उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरोप है कि मुस्लिम समाज की ही एक बिरादरी ने दूसरी बिरादरी के परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर उन्हें जुमे की नमाज़ पढ़ने से रोक दिया। शिकायत मिलने के बाद संभल पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मामला संभल के थाना एचौड़ा कंबोह क्षेत्र के गांव मांडली समसपुर का है। धुन्ना बिरादरी के मोहम्मद वसीम का आरोप है कि तुर्क बिरादरी के कुछ लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को गांव की बड़ी मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा करने से रोक दिया। उनका कहना है कि इतना ही नहीं, उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। इमाम उनके घर नहीं जाते, उनसे ज़कात नहीं ली जाती और धार्मिक आयोजनों में भी उन्हें शामिल नहीं किया जाता। वसीम का दावा है कि इस वजह से उनका परिवार मानसिक रूप से परेशान है और गांव छोड़ने तक की नौबत आ गई है।
मोहम्मद वसीम के मुताबिक विवाद नमाज़ पढ़ने के तरीके को लेकर शुरू हुआ था। उनका कहना है कि गांव की बड़ी मस्जिद में अपनाई जा रही एक धार्मिक परंपरा पर उन्होंने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उन्हें नमाज़ पढ़ने से रोक दिया गया। उनका यह भी दावा है कि वर्ष 2024 में पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया।
वसीम का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभल दौरे के दौरान दिए गए बयान—”तुर्कों की तुर्कई नहीं चलेगी”—के बाद उन्हें उम्मीद जगी कि उनकी शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी। इसी विश्वास के साथ उन्होंने जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई से मुलाकात कर अपने धार्मिक और मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी नागरिक को उसके धार्मिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, तो यह मौलिक अधिकारों का हनन है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित थाना प्रभारी को शिकायत के आधार पर जांच कर आवश्यक धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिकायतकर्ता के धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
पीटीसी (रिपोर्टर):
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद पुलिस क्या कदम उठाती है और शिकायतकर्ता को कब तक न्याय मिल पाता है।
कृष्ण कुमार विश्नोई, पुलिस अधीक्षक, संभल