सूरत में 100 से अधिक झुग्गियां ध्वस्त, जिम्मेदारी से बच रहे विभाग; मामला हाईकोर्ट पहुंचा

सूरत। गुजरात के सूरत शहर के वेद दरवाजा क्षेत्र में 100 से अधिक झुग्गियों को ध्वस्त किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी सरकारी विभाग सामने नहीं आ रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर उनके घरों को तोड़ा गया, जबकि संबंधित विभाग कार्रवाई से खुद को अलग बता रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 28 मई को क्षेत्र की करीब 100 झुग्गियों को गिरा दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें न तो कोई पूर्व नोटिस दिया गया और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। इसके विरोध में बस्ती निवासी हुसैन अजीज शेख ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई पर रोक लगाने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विवाद तब और गहरा गया जब सूरत नगर निगम ने विध्वंस कार्रवाई में अपनी भूमिका से इनकार कर दिया। नगर निगम आयुक्त एन. नागराजन के अनुसार निगम के अधिकारी केवल सड़क सीमांकन के लिए मौके पर मौजूद थे और किसी प्रकार के ध्वस्तीकरण का आदेश नहीं दिया गया था। वहीं पुलिस ने भी जिम्मेदारी नगर निगम पर डाल दी है।

स्थानीय भाजपा विधायक विनू मोराडिया ने भी पूरे मामले की पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब मामला गुजरात हाईकोर्ट में पहुंच चुका है, जहां यह तय हो सकता है कि आखिर झुग्गियों पर बुलडोजर किसके आदेश पर चला और क्या कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

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