नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अपने कार्यकाल के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन, शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण और विद्यार्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उनके नेतृत्व में शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, तकनीक आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में कई पहल की गईं।
अपने संदेश में उन्होंने व्यापक जनहित को सर्वोपरि बताते हुए पद छोड़ने के निर्णय को सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बताया। उन्होंने शिक्षा और विद्यार्थियों के हित को हमेशा प्राथमिकता देने की बात कही। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उच्च शिक्षा में सुधार जैसे कई कदम उठाए गए, जिन्हें शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में नई शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। वहीं, कई नेताओं और शिक्षाविदों ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके आगामी सार्वजनिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दी हैं।