हाइब्रिड फोटो’ के सहारे रेलवे नौकरी का खेल, बायोमेट्रिक जांच में खुला राज; मुंगेर के दो युवक गिरफ्तार

March 3, 2026
रिपोर्ट: रईस अल्वी, वरिष्ठ संवाददाता

बिहार के मुंगेर जिले से रेलवे भर्ती में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। टेक्नीशियन पद पाने के लिए दो युवकों ने मिलकर ऐसी साजिश रची कि करीब एक साल तक सिस्टम को धोखा देते रहे। लेकिन बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान उनकी चालाकी पकड़ में आ गई और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 की रेलवे भर्ती में मुंगेर निवासी मुकेश कुमार ने आवेदन किया था। चयन को लेकर आशंकित मुकेश ने अपने पड़ोसी व कोचिंग संचालक रंजीत कुमार से संपर्क किया। दोनों के बीच कथित तौर पर छह लाख रुपये में सौदा तय हुआ कि परीक्षा रंजीत देगा।

एडिटिंग से बनाई ‘मिलीजुली फोटो’

फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए दोनों ने इंटरनेट और फोटो एडिटिंग टूल्स की मदद से एक ऐसी तस्वीर तैयार की, जिसमें दोनों के चेहरे की समानता झलकती थी। इसी तथाकथित ‘हाइब्रिड फोटो’ के आधार पर रंजीत ने पटना में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) दी और बाद में भोपाल में मेडिकल परीक्षण भी पास कर लिया।

चयन के बाद ड्यूटी और ट्रेनिंग

जुलाई 2025 में मुकेश का चयन हो गया। उसने दमोह, सागर और जबलपुर रेल मंडलों में ड्यूटी भी की। अक्टूबर 2025 में उसे प्रयागराज प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन रेलवे के नियम के तहत एक वर्ष के भीतर रैंडम बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य था।

बायोमेट्रिक में पकड़ी गई गड़बड़ी

14 नवंबर 2025 को सत्यापन के दौरान अंगूठे और चेहरे का स्कैन भर्ती के समय दर्ज डाटा से मेल नहीं खाया। जांच में स्पष्ट हुआ कि प्रारंभिक बायोमेट्रिक रंजीत का था। मामला सामने आते ही मुकेश फरार हो गया, लेकिन बाद में जांच एजेंसी की टीम ने मुंगेर में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर रंजीत को भी पकड़ लिया गया।

अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि कहीं इस तरह की साजिश में अन्य अभ्यर्थी भी शामिल तो नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली को और सख्त किया जाएगा।

— STAR NEWS 24 | खबरों का साथी

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