सम्भल। जिले में पिछले कई दिनों से जारी बारिश ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से अगेती धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। खासकर जिन खेतों में धान में बालियां निकल रही हैं या दाना भरने की प्रक्रिया चल रही है, वहां पौधों के गिरने और फसल में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है।

उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश के कारण खेतों में पानी जमा न होने दें। खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी तत्काल कराई जाए। तेज हवा या बारिश के कारण यदि धान के पौधे गिर गए हैं तो उन्हें बाली के नीचे से सहारा देकर बांध दें। गिरे हुए पौधों में सड़न के लक्षण दिखाई देने पर कार्बेन्डाजिम का निर्धारित मात्रा में घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि लगातार नमी रहने से धान की निकलती बालियों में परागण प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा दाने काले पड़ने और फफूंदजनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। करीब 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान और अधिक नमी की स्थिति में धान में हल्दिया कंडवा रोग का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। खेतों में यूरिया का जरूरत से अधिक इस्तेमाल भी इस रोग को बढ़ावा दे सकता है।

रोग की चपेट में आने पर धान के दाने असामान्य रूप से फूलने लगते हैं और बाद में उनका रंग काला हो सकता है। ऐसे दाने खोखले और वजन में हल्के रह जाते हैं। संक्रमित बालियां दिखाई देने पर किसानों को उन्हें तुरंत खेत से निकालकर जमीन में दबाने या सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने और बीज उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा है। रोग की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, टेबुकोनाजोल अथवा हेक्साकोनाजोल का कृषि विभाग द्वारा सुझाई गई मात्रा के अनुसार इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल ने कहा कि लगातार बारिश के बीच किसान जलभराव रोकने के साथ फसल की नियमित निगरानी करें। धान में रोग या नुकसान के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के अधिकारियों अथवा विशेषज्ञों से संपर्क कर उचित उपचार कराया जाए।