STAR NEWS 24 – अंतरराष्ट्रीय डेस्क
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने युद्ध के आठवें दिन भी खाड़ी देशों की दिशा में अपने ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रखे। सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वायु रक्षा प्रणालियों ने इन हमलों को इंटरसेप्ट कर दिया। खास बात यह रही कि ये हमले ऐसे समय हुए जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पहले ही पड़ोसी देशों से माफी मांग चुके थे।
ईरानी सरकारी टीवी पर संबोधन के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा था कि ईरान की मंशा अपने पड़ोसी देशों को निशाना बनाने की नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान केवल उन परिस्थितियों में कार्रवाई कर रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को खतरे के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा कि यदि उनके एयरस्पेस या जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा तो ईरान भी इन देशों को निशाना नहीं बनाएगा।
हालांकि हालात जल्द ही बदलते नजर आए। शनिवार रात तेहरान में कई बड़े हमले हुए, जिनमें एक प्रमुख ऑयल डिपो को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों के लिए ईरान ने इजराइल को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजराइल के हाइफा ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की।
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की माफी को अपनी कूटनीतिक जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका और इजराइल के दबाव के कारण ईरान को झुकना पड़ा और उसने क्षेत्रीय देशों से माफी मांगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व के कई देशों ने इस रुख के लिए अमेरिका का धन्यवाद किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की रणनीति दोहरी हो सकती है—एक ओर वह पड़ोसी देशों के साथ सीधे टकराव से बचना चाहता है, वहीं दूसरी ओर इजराइल और अमेरिका को जवाब देने के लिए सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है।
मौजूदा हालात में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील कर रहा है।
STAR NEWS 24 – अंतरराष्ट्रीय डेस्क
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने युद्ध के आठवें दिन भी खाड़ी देशों की दिशा में अपने ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रखे। सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वायु रक्षा प्रणालियों ने इन हमलों को इंटरसेप्ट कर दिया। खास बात यह रही कि ये हमले ऐसे समय हुए जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पहले ही पड़ोसी देशों से माफी मांग चुके थे।
ईरानी सरकारी टीवी पर संबोधन के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा था कि ईरान की मंशा अपने पड़ोसी देशों को निशाना बनाने की नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान केवल उन परिस्थितियों में कार्रवाई कर रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को खतरे के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा कि यदि उनके एयरस्पेस या जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा तो ईरान भी इन देशों को निशाना नहीं बनाएगा।
हालांकि हालात जल्द ही बदलते नजर आए। शनिवार रात तेहरान में कई बड़े हमले हुए, जिनमें एक प्रमुख ऑयल डिपो को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों के लिए ईरान ने इजराइल को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजराइल के हाइफा ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की।
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की माफी को अपनी कूटनीतिक जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका और इजराइल के दबाव के कारण ईरान को झुकना पड़ा और उसने क्षेत्रीय देशों से माफी मांगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व के कई देशों ने इस रुख के लिए अमेरिका का धन्यवाद किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की रणनीति दोहरी हो सकती है—एक ओर वह पड़ोसी देशों के साथ सीधे टकराव से बचना चाहता है, वहीं दूसरी ओर इजराइल और अमेरिका को जवाब देने के लिए सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है।
मौजूदा हालात में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील कर रहा है।