घूंघट की झिझक छोड़ बनीं ‘ब्रांड ओनर’, बीए पास रानी ने खड़ा किया लाखों का कारोबार

₹1.5 लाख की पूंजी से शुरू किया सफर, ‘सिद्ध बाबा’ नाम से तेल-मसालों का कारोबार; सालाना करीब ₹3 लाख की शुद्ध आय

बहजोई (सम्भल)। ग्रामीण परिवेश में घूंघट और घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाओं के लिए अलावलपुर गांव की 33 वर्षीय बीए पास रानी शर्मा प्रेरणा बनकर उभरी हैं। कभी परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहीं रानी ने वर्ष 2022 में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) से जुड़कर स्वरोजगार की राह पकड़ी। आज वह ‘सिद्ध बाबा’ नाम से खाद्य उत्पादों का कारोबार कर रही हैं और अब तक चार लाख रुपये से अधिक के उत्पाद बेच चुकी हैं।
समूह बनाकर शुरू किया कारोबार
रानी ने वर्ष 2022 में ‘सिद्ध बाबा महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। समूह के माध्यम से ₹1.5 लाख का सीसीएल ऋण लेकर कृषि कार्य के साथ जरूरतमंद महिलाओं को भैंस खरीदने में भी आर्थिक मदद दी।
वर्ष 2025 में ₹1.5 लाख के सीआईएफ फंड से गांव में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट शुरू की। यहां पीली सरसों का कच्ची घानी तेल, शुद्ध पिसे मसाले और मल्टीग्रेन आटा तैयार कर ‘सिद्ध बाबा’ ब्रांड के नाम से बाजार में बेचा जा रहा है। पिसाई और पैकिंग के काम में समूह की 10 महिलाओं को रोजगार मिला है।
सरस आउटलेट ने बढ़ाया बाजार
जिला प्रशासन के सहयोग से कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सरस फूड आउटलेट एवं शोरूम में समूह को दुकान मिली। यहां से प्रतिमाह करीब ₹5 से ₹6 हजार की सीधी बचत हो रही है। विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में भी उत्पादों की बिक्री बढ़ी है। हाल ही में रोडवेज परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में स्टॉल से कुछ ही समय में ₹64 हजार के उत्पादों की बिक्री हुई।
रानी अब आगामी त्योहारों को देखते हुए विशेष मोमबत्तियां, हस्तनिर्मित राखियां और घर में तैयार शुद्ध नमकीन-सेव बनाने की तैयारी कर रही हैं। उनके प्रयासों से समूह की महिलाओं को गांव में ही रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि रानी शर्मा ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। एनआरएलएम के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर प्रशासन का विशेष जोर है।
रानी शर्मा ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के सामने सबसे बड़ी बाधा संकोच और झिझक होती है। महिलाओं को अपने हुनर पर भरोसा रखकर समूह के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। सरकार की योजनाएं उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही हैं।