इतनी खुशी मनाने की जरूरत नहीं है… अरविंद केजरीवाल के बरी होने पर बोले भाजपा नेता कपिल मिश्रा

दिल्ली की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की भावुक प्रतिक्रिया पर दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने तीखा हमला बोला है। मिश्रा ने केजरीवाल के भावुक होने को “नौटंकी” करार देते हुए कहा कि दिल्ली की जनता उन्हें नकार चुकी है और अब भावनाओं के सहारे राजनीति नहीं चलने वाली। शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले के मामले में केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद केजरीवाल मीडिया के सामने भावुक हो गए थे। इसी को लेकर कपिल मिश्रा ने सवाल उठाए हैं।

“अगर सब सही था तो नीति वापस क्यों ली?”

कपिल मिश्रा ने कहा कि अगर शराब नीति पूरी तरह सही थी और उसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ, तो आरोप लगते ही उसे वापस क्यों ले लिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि कमीशन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया, एक बोतल के साथ एक बोतल मुफ्त जैसी योजनाएं लागू की गईं और इससे सरकार को राजस्व नुकसान हुआ। मिश्रा ने कहा, “अगर अरविंद केजरीवाल ईमानदार हैं तो इन सवालों के जवाब दें। जनता भी यही जानना चाहती है कि आखिर नीति में ऐसा क्या था, जिसे लेकर इतना विवाद हुआ?” उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल के पास इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में अभी कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मिश्रा ने याद दिलाया कि इस केस को लेकर पहले उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में भी सख्त टिप्पणियां हुई थीं। उन्होंने कहा, “इतनी खुशी मनाने की जरूरत नहीं है। कानून अपना काम करेगा और सच सामने आएगा।”

अदालत से राहत, पर राजनीतिक बहस बरकरार

आबकारी नीति मामले, जिसे आमतौर पर “शराब नीति घोटाला” कहा जाता है, में केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहना पड़ा था। अदालत से बरी होने के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे “सत्य की जीत” बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियों ने राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की थी। हालांकि, विपक्ष का रुख आक्रामक है। कपिल मिश्रा के बयान से साफ है कि यह मामला अदालत से बाहर भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।

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