नई दिल्ली/नोएडा। मध्य-पूर्व में जारी तनाव और तेल-गैस आपूर्ति में आई रुकावट का असर अब देश के आम जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। एलपीजी (रसोई गैस) की बढ़ती कीमतों और कमर्शियल सिलेंडरों की कमी के चलते छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े होटल-रेस्टोरेंट तक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इसका सीधा असर खाने-पीने की रोजमर्रा की चीजों के दाम पर पड़ा है, जिससे महंगाई का बोझ आम लोगों पर बढ़ता जा रहा है।
राजधानी दिल्ली और नोएडा के रेहड़ी-खोमचा संचालकों का कहना है कि जो चाय पहले 10 रुपये में मिलती थी, अब वही 15 से 20 रुपये प्रति कप बिक रही है। वहीं पूरी-सब्जी, समोसा, गोलगप्पे और मटर-पनीर जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी तेजी आई है। कई ढाबों और रेस्टोरेंटों ने बढ़ती लागत के कारण अपने मेन्यू में बदलाव कर दिया है और थाली में मिलने वाले व्यंजनों की मात्रा घटा दी है।

कारोबारियों के अनुसार 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत कुछ जगहों पर 2500 से 2800 रुपये तक पहुंच गई है। गैस की कमी के कारण सिलेंडर हासिल करने के लिए बोली लगाने जैसी स्थिति भी सामने आ रही है। कई छोटे दुकानदारों को गैस न मिलने के कारण अस्थायी रूप से अपनी दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं या फिर उन्हें इलेक्ट्रिक इंडक्शन व अन्य विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी रसोई गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ गया है। होटल और रेस्टोरेंट संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
फिलहाल केंद्र सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर एलपीजी संकट ने आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अब राहत के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।