Holi 2026: भारत के ऐसे अनोखे गांव जहां नहीं मनाई जाती होली, त्योहार के दिन छा जाता है सन्नाटा

रईस अल्वी, वरिष्ठ पत्रकार

STAR NEWS 24 -पूरे देश में होली का त्योहार रंग, गुलाल और खुशियों के साथ मनाया जा रहा है। शहरों से लेकर गांवों तक लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर और गले मिलकर इस पर्व की खुशियां बांट रहे हैं। ढोल-नगाड़ों, गीतों और उत्सव के माहौल के बीच हर तरफ उमंग और उल्लास दिखाई देता है।

लेकिन भारत में कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां होली के दिन रंग और गुलाल नहीं उड़ते, बल्कि चारों ओर सन्नाटा पसरा रहता है। यहां के लोग वर्षों से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और लोकविश्वासों के कारण इस त्योहार को नहीं मनाते।

उत्तराखंड के गांवों में नहीं खेली जाती होली

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कुरझां और क्विली गांव में पिछले करीब डेढ़ सौ वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। स्थानीय मान्यता के अनुसार, गांव की आराध्य देवी त्रिपुर सुंदरी शोर-शराबा और हुड़दंग पसंद नहीं करतीं। देवी के प्रति श्रद्धा और सम्मान के चलते ग्रामीण होली के दिन किसी प्रकार का उत्सव नहीं मनाते और पूरे गांव में शांति बनाए रखते हैं।

झारखंड के दुर्गापुर गांव की अनोखी परंपरा

झारखंड के बोकारो जिले के कसमार ब्लॉक स्थित दुर्गापुर गांव में भी लंबे समय से होली नहीं खेली जाती। लोककथाओं के अनुसार करीब एक सदी पहले गांव के राजा के पुत्र की मृत्यु होली के दिन हो गई थी और कुछ समय बाद स्वयं राजा का भी उसी दिन निधन हो गया। मरने से पहले राजा ने गांव में होली न मनाने का आदेश दिया था। तब से ग्रामीण इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं और मानते हैं कि इसे तोड़ना अशुभ हो सकता है।

गुजरात का रामसन गांव

गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित रामसन गांव में भी करीब 200 वर्षों से होली का उत्सव नहीं मनाया जाता। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान राम अपने वनवास के दौरान इस स्थान से गुजरे थे। वहीं कुछ कथाओं में यह भी कहा जाता है कि किसी समय संतों ने यहां के एक अहंकारी राजा के कारण गांव को श्राप दे दिया था, जिसके बाद से यहां होली का आयोजन बंद हो गया।

दक्षिण भारत में अलग परंपरा

दक्षिण भारत के कई हिस्सों, विशेष रूप से तमिलनाडु में होली के समय ‘मासी मागम’ पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र नदियों और तालाबों में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसी कारण यहां उत्तर भारत की तरह रंगों वाली होली का उत्साह कम देखने को मिलता है।

भारत की सांस्कृतिक विविधता ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। जहां एक ओर देश के अधिकांश हिस्सों में होली रंगों और उत्सव का प्रतीक है, वहीं कुछ स्थानों पर परंपराओं और मान्यताओं के कारण इस दिन सन्नाटा छाया रहता है। यही विविधता भारतीय संस्कृति को और भी अनोखा बनाती है।

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