चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में माता-पिता के नाम को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि माता या पिता के तलाक के बाद दूसरी शादी करने से बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज जैविक पिता का नाम केवल पुनर्विवाह के आधार पर नहीं बदला जा सकता।
मामला एक महिला की याचिका से जुड़ा था। महिला ने तलाक के बाद दूसरी शादी की थी और अपने नाबालिग बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में पूर्व पति की जगह दूसरे पति का नाम दर्ज कराने की मांग की थी। महिला की दलील थी कि वर्तमान पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए बच्चे के दस्तावेज में उसके दूसरे पति का नाम होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाणपत्र बच्चे के जन्म के समय के वास्तविक और जैविक तथ्यों का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। बाद में होने वाला तलाक या पुनर्विवाह उस समय दर्ज जैविक संबंध को नहीं बदलता। इसलिए केवल पारिवारिक परिस्थितियों में बदलाव के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र में जैविक पिता का नाम हटाकर दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं किया जा सकता।
अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि पुनर्विवाह के बाद भी जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज मूल जैविक तथ्य अपनी जगह बने रहेंगे।
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हाजी रईस अल्वी
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