नई दिल्ली। गाजियाबाद निवासी 31 वर्षीय हरीश राणा का अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट पर किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान उनके छोटे भाई आशीष राणा ने मुखाग्नि दी। इस भावुक पल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पिता अशोक राणा ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा, “कोई रोना मत, बेटा शांति से जाए।”
बताया जा रहा है कि हरीश राणा ने 24 मार्च को एम्स दिल्ली में अंतिम सांस ली। वह पिछले करीब 13 वर्षों से कोमा में थे और लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद उन्हें पैसिव इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) दी गई थी, जिसके बाद उनका निधन हो गया।
अंतिम संस्कार से पहले परिवार ने एक बड़ा और मानवीय फैसला लेते हुए हरीश के अंगदान की सहमति दी। डॉक्टरों के अनुसार उनके फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए गए हैं, जिससे करीब छह लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।
यह मामला देश में इच्छामृत्यु के बेहद दुर्लभ मामलों में से एक माना जा रहा है। दुख की इस घड़ी में भी परिवार ने अंगदान कर मानवता की मिसाल पेश की है, जिसकी समाज में व्यापक सराहना की जा रही है।