पात्र लाभार्थियों को मिलेगा 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान, बकरियों का बीमा भी योजना में शामिल
सम्भल (बहजोई), 4 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पशुपालन को बढ़ावा देने और जरूरतमंद परिवारों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जनपद में बकरी पालन योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र लाभार्थी बकरी पालन यूनिट स्थापित कर अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि योजना के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों के पात्र लाभार्थियों को बकरी पालन यूनिट स्थापित करने के लिए सरकारी सहायता दी जाती है। योजना में कुछ यूनिट अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा कुछ यूनिट सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों के लिए निर्धारित हैं। पात्र लाभार्थी को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत अंश स्वयं वहन करना होगा, जबकि शेष 90 प्रतिशत धनराशि सरकार द्वारा अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। योजना में बकरियों का बीमा भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य विशेष रूप से सीमित संसाधनों वाले जरूरतमंद लोगों को स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराना है। विधवा, निराश्रित, दिव्यांग, भूमिहीन तथा अन्य पात्र जरूरतमंद व्यक्ति निर्धारित पात्रता एवं विभागीय मानकों को पूरा करने पर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र आवश्यक हैं। विधवा लाभार्थी के मामले में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। लाभार्थियों का चयन निर्धारित प्रक्रिया एवं पात्रता के आधार पर किया जाएगा। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन है। इच्छुक लाभार्थी आवश्यक अभिलेखों के साथ संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी अथवा पशुपालन विभाग के कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थी पांच बकरी और एक बकरा खरीदकर बकरी पालन का व्यवसाय शुरू कर सकता है। बकरी पालन से दूध, मांस और बकरी के बच्चों की बिक्री के माध्यम से आय का स्रोत विकसित किया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनपद में संचालित स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं का लाभ पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। बकरी पालन जैसी योजनाएं ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, पात्र लोगों को इसकी जानकारी उपलब्ध कराने तथा पारदर्शी एवं नियमानुसार प्रक्रिया के तहत लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।