रईस अल्वी वरिष्ठ संवाददाता

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की देवा शरीफ दरगाह पर बुधवार को होली का अनूठा और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस मौके पर दरगाह के हरे गुंबद के पास गुलाल उड़ाया गया और पूरा परिसर रंगों की खुशबू से सराबोर हो गया। ढोल की थाप और सूफियाना कव्वालियों के बीच श्रद्धालुओं ने जमकर होली का आनंद लिया।
नई गठित कमेटी की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग राज्यों से आए हिंदू और मुस्लिम श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दरगाह परिसर में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।

इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष शहजादे आलम भी मौजूद रहे। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाएं और दरगाह की गंगा-जमुनी संस्कृति को मजबूत बनाए रखें। उन्होंने बताया कि यहां की होली खास होती है, क्योंकि इसमें केवल गुलाल और गुलाब की पंखुड़ियों से ही होली खेली जाती है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि देवा शरीफ की यह होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। हर साल यहां हजारों लोग पहुंचकर इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनते हैं और देश को भाईचारे का संदेश देते हैं।