मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नया दिशा-निर्देश जारी किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि अब इस मार्ग से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों को ईरानी नौसेना के साथ समन्वय स्थापित करना अनिवार्य होगा। इस कदम से साफ संकेत मिलता है कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी निगरानी और नियंत्रण मजबूत करना चाहता है।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं देशों के जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी जो उसके प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाते हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि जिन देशों ने हालिया संघर्ष में अमेरिका और इज़राइल का समर्थन किया है, उनके जहाजों को सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती।
इसी बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोज़तबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में कहा कि देश अपने विरोधियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे कठोर कदम भी उठा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर होने का दावा कर रहा है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जहां ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। एलएनजी की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय प्रयास जरूरी हो सकते हैं।