पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच भारत को कूटनीतिक स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। जानकारी के अनुसार भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह फैसला भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को सुचारु रूप से खुला रखना था, ताकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर कोई बड़ा असर न पड़े। इसके साथ ही भारत ने वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय कूटनीतिक पहल करते हुए रूस और फ्रांस सहित कई प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क साधा। इस प्रयास का मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाना बताया गया है।
ईरान द्वारा भारत को दी गई यह विशेष छूट ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका, यूरोप और इज़राइल से जुड़े कई जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने को लेकर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय टैंकरों को सुरक्षित आवागमन की अनुमति मिलना भारत की संतुलित विदेश नीति और प्रभावी कूटनीति का परिणाम है।
सूत्रों का कहना है कि मौजूदा हालात के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है और कई देशों के तेल टैंकर रास्ते में फंसे हुए हैं। ऐसे में भारत के लिए यह अनुमति ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल दर्शाती है कि भारत संकट के दौर में भी अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय और संतुलित भूमिका निभाने में सक्षम है।