लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और उसके भारत पर पड़ रहे असर को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के परिणाम गंभीर हो सकते हैं और देश में ऊर्जा संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने खासतौर पर एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसका असर आम जनता और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने सदन में सवाल उठाया कि क्या भारत की ऊर्जा नीति अब अमेरिका के फैसलों पर निर्भर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि “क्या अमेरिका यह तय करेगा कि भारत तेल और गैस किस देश से खरीदे? क्या हमें रूस से तेल खरीदने से रोका जाएगा?” उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से गुजरता है और यदि यह मार्ग प्रभावित होता है तो वैश्विक संकट गहरा सकता है।
इस दौरान राहुल गांधी द्वारा अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का उल्लेख करने पर सदन में हंगामे की स्थिति भी बन गई। स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें विषय पर केंद्रित रहने और नियमों के तहत चर्चा करने की सलाह दी।
केंद्र सरकार की ओर से जवाब देते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति को नियंत्रण में बताया। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है और आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्री ने जानकारी दी कि होर्मुज क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कुछ आवाजाही प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन भारत के पास वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग मौजूद हैं और देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि घरेलू गैस उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और बुकिंग से डिलीवरी तक का औसत समय अब भी लगभग ढाई दिन बना हुआ है। सरकार ने हालात पर नजर रखने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जो सभी पक्षों के साथ समन्वय कर रही है।
मंत्री ने कालाबाजारी और अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि सरकार लगातार निगरानी कर रही है ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।