अमेरिका: सोशल मीडिया ट्रायल में Meta को झटका, जज ने ‘बढ़ा-चढ़ाकर’ किए गए दावों वाला दस्तावेज पेश करने से रोका

STAR NEWS 24 / RAIS ALVI

अमेरिका के लॉस एंजिल्स में चल रहे चर्चित सोशल मीडिया ट्रायल में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अदालत ने Meta (Facebook की मूल कंपनी) को एक ऐसा दस्तावेज अदालत में पेश करने से रोक दिया, जिसमें वादी (Plaintiff) ने अपने बचपन में कथित यौन शोषण और अन्य गंभीर परिस्थितियों का उल्लेख किया था। जज ने इस दस्तावेज को “अतिशयोक्तिपूर्ण” यानी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया।

यह मामला एक 20 वर्षीय युवती, जिसे अदालत में Kaley G.M. के नाम से पहचाना गया है, द्वारा दायर किया गया है। युवती का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लत ने उसकी मानसिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

क्या था विवादित दस्तावेज

Meta के वकील पॉल श्मिट अदालत में एक हाउसिंग एप्लिकेशन फॉर्म पेश करना चाहते थे। यह फॉर्म युवती ने मई 2024 में भरा था, जब उसकी मां ने उसे घर से निकाल दिया था और वह रहने के लिए जगह ढूंढ रही थी।

फॉर्म में पूछे गए सवाल “क्या आपने जीवन में कोई दर्दनाक या आघातकारी घटना झेली है?” के जवाब में युवती ने लिखा था कि उसे बचपन में:

  • उपेक्षा (Neglect)
  • भावनात्मक शोषण
  • शारीरिक शोषण
  • और यौन शोषण

का सामना करना पड़ा।

Meta का तर्क था कि इस दस्तावेज से यह साबित किया जा सकता है कि युवती ने अपने जीवन की समस्याओं में सोशल मीडिया की लत को प्रमुख कारण नहीं बताया, जबकि अदालत में वह यही दावा कर रही है।

जज ने क्यों रोका दस्तावेज

मामले की सुनवाई कर रहीं जज कैरोलिन कुहल ने दस्तावेज देखने के बाद इसे अदालत में पेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

जज ने कहा कि दस्तावेज में किए गए कुछ दावे “बढ़ा-चढ़ाकर” बताए गए प्रतीत होते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अदालत में अब तक ऐसे किसी यौन शोषण के आरोप का कोई सबूत या चर्चा हुई है।

Meta के वकील ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि युवती ने यह जानकारी कहां से लिखी, क्योंकि उसकी गवाही या मेडिकल रिकॉर्ड में इसका उल्लेख नहीं है।

सोशल मीडिया लत का बड़ा केस

यह मुकदमा अमेरिका में चल रहे उन मामलों में से एक है जिसमें दावा किया जा रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युवाओं को लत लगाकर मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं

इस ट्रायल में Meta के साथ-साथ Google भी बचाव पक्ष का हिस्सा है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके नतीजे भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी तय कर सकते हैं।

गवाहों की लंबी गवाही

अदालत में युवती की ओर से कई विशेषज्ञ गवाह पेश किए जा चुके हैं। इनमें मनोचिकित्सक डॉ. कारा बैगोट भी शामिल हैं, जो लगातार कई दिनों से अदालत में गवाही दे रही हैं। बताया गया है कि यह उनका पांचवां दिन होगा, जो अदालत में असामान्य माना जा रहा है।

मुख्य वादी वकील मार्क लैनीयर के पास अब लगभग 5 घंटे 56 मिनट का समय बचा है, जबकि बचाव पक्ष (Meta और Google) के पास करीब 11 घंटे 11 मिनट का समय शेष है।

आगे क्या होगा

जज ने दोनों पक्षों को चेतावनी दी है कि वे समय का सही उपयोग करें और अनावश्यक सवालों से बचें। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को समय की कमी के कारण जिरह (cross-examination) का मौका नहीं मिलता, तो इससे भविष्य में अपील का रास्ता खुल सकता है

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