रईस अल्वी, वरिष्ठ पत्रकार
आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार का नाम शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
राजीव कुमार का नाम पहले भी सारधा और रोजवैली चिटफंड घोटालों की जांच के दौरान विवादों में रहा है। इन मामलों में उनकी भूमिका को लेकर कई बार सवाल उठे और केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा उनसे पूछताछ भी की गई थी।
ममता बनर्जी का समर्थन
साल 2019 में जब सीबीआई ने राजीव कुमार से पूछताछ की कोशिश की थी, तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके समर्थन में कोलकाता में धरना दिया था। उस समय उन्होंने इसे “संविधान बचाने की लड़ाई” बताया था।
आरोप यह भी लगे थे कि जांच के दौरान कुछ साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हुई थी। उस समय राजीव कुमार राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) के प्रमुख थे।
कई बार पद से हटाए गए
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने भी उन्हें कई बार उनके पद से हटाया था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें डीजीपी पद से हटाने का आदेश दिया गया था।
विपक्षी दलों ने उन पर विपक्षी नेताओं के फोन टैप करने और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम करने जैसे आरोप भी लगाए थे।
अन्य उम्मीदवार भी घोषित
तृणमूल कांग्रेस की सूची में अन्य प्रमुख नाम भी शामिल हैं। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बाबुल सुप्रियो को भी राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और बांग्ला फिल्म जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री कोयल मल्लिक को भी पार्टी ने राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है।
राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता के बीच तृणमूल कांग्रेस का यह फैसला एक मजबूत राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सबकी नजरें राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।