पहले माफी, फिर हमले: खाड़ी देशों पर ईरान की कार्रवाई के पीछे क्या वजह?

पहले माफी, फिर हमले: खाड़ी देशों पर ईरान की कार्रवाई के पीछे क्या वजह?

मिडिल ईस्ट। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने युद्ध के आठवें दिन भी खाड़ी देशों पर हमलों की कार्रवाई जारी रखी। सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा इंटरसेप्ट किए जाने की खबरें सामने आई हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये हमले उस बयान के बाद हुए, जिसमें ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा था कि ईरान की मंशा उन्हें निशाना बनाने की नहीं है।

ईरानी सरकारी टीवी पर दिए गए अपने संबोधन में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ टकराव नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की जमीन या एयरस्पेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा, तो ईरान भी उन देशों को निशाना नहीं बनाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने या आत्मसमर्पण करने वाला नहीं है।

हालांकि, माफी के इस बयान के कुछ ही समय बाद हालात फिर से बिगड़ गए। शनिवार रात Israel द्वारा Tehran में कई ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें एक तेल डिपो पर हमला सबसे गंभीर बताया गया। इसके जवाब में ईरान की सेना और विशेष रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल के Haifa स्थित तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया।

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की माफी को अमेरिका और इजराइल के दबाव का परिणाम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि लगातार हमलों और दबाव के कारण ईरान को अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगनी पड़ी और अब वह पहले जैसी ताकतवर स्थिति में नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को जटिल बना सकता है। खाड़ी देशों की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय संतुलन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की जा रही है।

रिपोर्ट: रईस अल्वी
STAR NEWS 24

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