अमेरिका में व्यापारिक नीतियों को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनियों को भारी भरकम रकम लौटाने का आदेश दिया है।
न्यूयॉर्क की फेडरल अदालत के जज Richard Eaton ने अपने फैसले में कहा कि जिन कंपनियों ने विवादित टैरिफ का भुगतान किया है, वे सभी रिफंड पाने की हकदार हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह रिफंड केवल याचिका दायर करने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी आयातकों पर लागू होगा जिन्होंने यह शुल्क भरा था।
यह मामला 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए आयात शुल्क से जुड़ा है। अदालत ने माना कि इस कानून का इस्तेमाल कर लगाए गए कुछ टैरिफ कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं।
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक अमेरिकी सरकार इन टैरिफ के जरिए करीब 130 अरब डॉलर वसूल चुकी थी। बाद की वसूली को जोड़ने पर यह रकम करीब 175 अरब डॉलर (लगभग 16 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है, जिसे अब कंपनियों को लौटाना पड़ सकता है।
अदालत के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने संकेत दिया है कि सरकार 10 प्रतिशत के यूनिवर्सल टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है। हालांकि यह नया टैरिफ सीमित समय के लिए ही लागू हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर रिफंड और नए टैरिफ की संभावनाओं के कारण आने वाले समय में वैश्विक व्यापारिक माहौल में अस्थिरता बढ़ सकती है।