
STAR NEWS 24 RAIS ALVI
संभल में होली पर्व को लेकर उत्साह चरम पर है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक होलिका दहन की तैयारियां तेज हो गई हैं। मोहल्लों और चौराहों पर लकड़ी, उपले और पूजन सामग्री एकत्र की जा रही है। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा की तैयारी कर रहे हैं। बाजारों में भी जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। गुलाल, अबीर, रंग-बिरंगे पाउडर, पिचकारी, पानी वाले गुब्बारे, बच्चों के लिए रंगीन मुखौटे और टोपी की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है।
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के दहन की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है। इसका संदेश है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है, जबकि सच्चाई और भक्ति की विजय होती है। इसी कारण होली को सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का पर्व भी कहा जाता है।
बाजारों में गन्ने की खरीदारी भी बढ़ गई है। लोग होलिका दहन के समय गन्ना, नई फसल की बालियां और नारियल चढ़ाते हैं। इसके अलावा गुजिया, मठरी, नमकीन, पापड़ और मिठाइयों की दुकानों पर भी भीड़ है। घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जा रहे हैं। महिलाएं पूजा के लिए रोली, चावल, कच्चा सूत, हल्दी और फूल खरीद रही हैं।
होलिका दहन के दिन शाम को विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। लोग परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अगले दिन धुलेंडी पर रंगों से होली खेली जाती है। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, डीजे और लोकगीतों का आयोजन भी होता है।
इस तरह होली का पर्व न केवल आनंद और उत्साह का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी प्रेम और सौहार्द का संदेश भी देता है। जनपद संभल में भी लोग पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
