रईस अल्वी, वरिष्ठ पत्रकार
STAR NEWS 24= मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान की 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय युद्ध जैसे हालात के बीच 3 मार्च 2026 को लिया गया।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई
करीब 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरानी सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। वे औपचारिक रूप से मध्यम स्तर के धार्मिक नेता माने जाते हैं, लेकिन सुरक्षा और राजनीतिक तंत्र में उनकी पकड़ काफी मजबूत बताई जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार उनके संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़ी बसिज फोर्स से गहरे माने जाते हैं, जो ईरान के सैन्य और सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा हैं।
वर्चुअल बैठक में हुआ चयन
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल के हालिया हमलों के कारण तेहरान में सामान्य बैठक आयोजित करना संभव नहीं था। ऐसे में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से मतदान कर नए सुप्रीम लीडर का चयन किया।
बताया जा रहा है कि युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए कड़े और स्थिर नेतृत्व की जरूरत का हवाला दिया गया, जिसके आधार पर मोजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति बनी।
फैसले पर उठ रहे सवाल
ईरान की 1979 की इस्लामिक क्रांति का मुख्य उद्देश्य राजशाही व्यवस्था को समाप्त करना था। उस समय वंशानुगत सत्ता को गैर-इस्लामी बताया गया था। ऐसे में पिता के बाद बेटे के सर्वोच्च नेता बनने पर कुछ राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ईरान के कट्टरपंथी गुट की मजबूती का संकेत माना जा रहा है, जबकि सुधारवादी धड़े में असंतोष की संभावना जताई जा रही है।
नई नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौतियां
मोजतबा खामेनेई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी धार्मिक और राजनीतिक वैधता को मजबूत करना होगी। उनके पास अपने पिता की तरह “आयतुल्लाह” का उच्च धार्मिक दर्जा नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में उन्हें अपनी सत्ता को मजबूत बनाए रखने के लिए सैन्य और सुरक्षा तंत्र पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे ईरान की राजनीति में सैन्य प्रभाव और बढ़ सकता है।