नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में चल रहे आंदोलन के समाप्त होने और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सबसे पहले राजघाट पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक बताया।
राजघाट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण संघर्ष का जो मार्ग देश को दिखाया था, वह आज भी समाज और लोकतंत्र के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना करीब 100 वर्ष पहले था। उन्होंने कहा कि किसी भी जनआंदोलन का उद्देश्य संवाद और सकारात्मक परिवर्तन होना चाहिए तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा शांतिपूर्ण तरीके से ही संभव है।
वांगचुक ने यह भी कहा कि देश के युवाओं और छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए तथा उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। राजघाट पहुंचने के दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो भी उनके साथ मौजूद रहीं। दोनों ने कुछ समय तक मौन रहकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
गौरतलब है कि हाल ही में जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और उसके बाद स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अस्पताल में भर्ती रहने के बाद यह सोनम वांगचुक का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। राजघाट से उन्होंने एक बार फिर अहिंसा, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।