घटना के बाद जागा प्रशासन ?…..हाईवे पर अवैध टेंपो का आतंक: बड़े हादसे के बाद जागा प्रशासन, क्यों बस मालिकों ने खड़ी की गाड़ियां ?


घटना के बाद जागा प्रशासन ?…..हाईवे पर अवैध टेंपो का
आतंक: बड़े हादसे के बाद जागा प्रशासन, क्यों बस मालिकों ने खड़ी की गाड़ियां ?

रईस अल्वी संवाददाता संभल..

संभल जिले में हाल ही में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद एक बार फिर हाईवे पर अवैध रूप से चल रहे टेंपो और कमजोर यातायात व्यवस्था का मुद्दा चर्चा में आ गया है। धनारी थाना क्षेत्र में हुए हादसे में टेंपो और कार की टक्कर से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दर्दनाक घटना के बाद जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है।?
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि आगरा–मुरादाबाद नेशनल हाईवे पर लंबे समय से अवैध रूप से टेंपो संचालित हो रहे हैं। इन टेंपो में क्षमता से अधिक 12 से 15 सवारियां बैठाकर चालक तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद इन अवैध टेंपो पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।


हादसे के बाद एआरटीओ संभल अमिताभ कुमार सिंह और यातायात प्रभारी द्वारा चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान कई टेंपो को सीज किया गया और हजारों रुपये के चालान भी काटे गए। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल खानापूर्ति है, क्योंकि हादसे के बाद ही अचानक सख्ती दिखाई जाती है, जबकि पहले से इस पर नियंत्रण नहीं किया जाता।


परिवहन नियमों के अनुसार किसी भी टेंपो या थ्री-व्हीलर को नेशनल हाईवे पर सवारियां ढोने की अनुमति नहीं होती है, खासकर लंबी दूरी और तेज रफ्तार वाले मार्गों पर। इन वाहनों की सवारी क्षमता भी सीमित होती है, लेकिन नियमों की अनदेखी करते हुए कई टेंपो चालक अधिक सवारियां बैठाकर हाईवे पर दौड़ते नजर आते हैं। इससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है।?


इस पूरे मामले में बस मालिकों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। बस स्वामियों का कहना है कि अवैध टेंपो संचालन के कारण उनकी बसों को सवारियां नहीं मिल रही हैं। टेंपो चालक बसों के आगे-पीछे चलकर रास्ते में ही सवारियां बैठा लेते हैं, जिससे बसों का संचालन घाटे का सौदा बन गया है। इसी कारण जिले में करीब 60 से 70 बसों को फिलहाल खड़ा कर दिया गया है।


बस मालिकों का कहना है कि उन्होंने अपनी बसों का संचालन रोक दिया है क्योंकि न तो उन्हें पर्याप्त सवारियां मिल रही हैं और न ही वे अपने वाहनों का टैक्स समय पर जमा कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि जब भी वे टेंपो चालकों को सवारी बैठाने से रोकते हैं तो विवाद की स्थिति बन जाती है। इसके बावजूद परिवहन विभाग और यातायात पुलिस इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं।


बसों के खड़े होने से सरकार को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।? यदि जिले में दर्जनों बसें बंद पड़ी हैं और उनका टैक्स जमा नहीं हो पा रहा है, तो इससे सरकारी राजस्व पर सीधा असर पड़ रहा है। ? वहीं यात्रियों को भी मजबूरी में अवैध टेंपो में सफर करना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।


स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि हाईवे पर अवैध टेंपो संचालन पर सख्ती से रोक लगाई जाए और बसों का नियमित संचालन शुरू कराया जाए तो यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मिल सकती है और इस तरह के बड़े हादसों को रोका जा सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मुद्दे पर स्थायी समाधान निकालता है या फिर हर बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती रहेगी।

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