मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट पर उठे सवाल, एफआईआर के बाद भी गिरफ्तारी नहीं
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान हुई एक घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई और आधिकारिक बयानों पर सवाल उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ कांवड़ियों द्वारा दो पुलिसकर्मियों को सरकारी जीप से बाहर निकालकर कथित रूप से मारपीट करने, सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ने का आरोप है। बताया गया कि घटना में एक हेड कांस्टेबल घायल हुआ, जबकि पुलिस वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ।
घटना के बाद करीब 24 घंटे तक मामला सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। बाद में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय की ओर से इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस का कहना है कि मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कुछ मोटरसाइकिलों को कब्जे में लेने की जानकारी दी है।
वहीं, पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार शुरुआती विवाद कांवड़ियों के दो समूहों के बीच हुआ था। दोनों पक्षों का मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं दी गई। बाद में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि जब पुलिसकर्मियों के घायल होने की पुष्टि हुई और एफआईआर भी दर्ज हो गई, तो घटना सार्वजनिक होने में देरी क्यों हुई तथा आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई किस चरण में है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।