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नई दिल्ली |STAR NEWS24
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सदन में बोलते हुए संसद की कार्यप्रणाली और नियमों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां नियमों व परंपराओं का पालन होना बेहद जरूरी है।
गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष के सांसदों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। गोगोई ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संसद की गरिमा और लोकतंत्र की मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कई बार अविश्वास प्रस्ताव सदन में लाए गए थे और उस समय डिप्टी स्पीकर की मौजूदगी में कार्यवाही संचालित होती थी। लेकिन इस बार जब विपक्ष के करीब 200 सांसद मौजूद हैं, तब डिप्टी स्पीकर का पद खाली है, जो चिंता का विषय है।
गोगोई ने सदन में माइक्रोफोन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि माइक भी अब एक तरह का “अस्त्र” बन गया है, जिसका इस्तेमाल सत्ता पक्ष के पक्ष में अधिक किया जा रहा है, जबकि विपक्ष के सांसदों को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं मिलता। उन्होंने इसे संसद के नियमों का उल्लंघन बताया।
सुप्रीम कोर्ट के रेबीया केस का हवाला देते हुए गोगोई ने कहा कि स्पीकर और चेयर पर बैठे व्यक्ति को निष्पक्ष रहना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि स्पीकर द्वारा बनाए गए पैनल में से कौन चेयर पर बैठेगा और इसका फैसला किस आधार पर किया जाता है।
इस पर भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने जवाब देते हुए कहा कि स्पीकर के कार्यालय को यह अधिकार है कि वे तय करें कि पैनल में से कौन सदस्य सदन की कार्यवाही संचालित करेगा।
वहीं बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब सदन चुनाव प्रक्रिया में भी जाता है, तब भी स्पीकर का कार्यालय कार्यरत रहता है और यह पद कभी खाली नहीं रहता। उन्होंने कहा कि गोगोई द्वारा निकाले जा रहे निष्कर्ष सही नहीं हैं और उनका खंडन किया जाना आवश्यक है।
लोकसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया।