जदयू छोड़ केसी त्यागी ने थामा आरएलडी का दामन, बोले— जयंत चौधरी को ‘चरण सिंह’ जैसा नेता बनते देखना चाहता हूं
star news 24 : जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता रहे K. C. Tyagi ने पार्टी से अलग होने के बाद अपना नया राजनीतिक ठिकाना चुन लिया है। उन्होंने Jayant Chaudhary की मौजूदगी में Rashtriya Lok Dal (आरएलडी) का दामन थाम लिया। पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई।
हाल ही में केसी त्यागी ने Janata Dal (United) से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद की कमी और विस्तार की सीमित संभावनाओं को अपने फैसले की मुख्य वजह बताया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह जल्द ही किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं।
आरएलडी ज्वाइन करने के बाद केसी त्यागी ने साफ कहा कि वह किसी पद या चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा लेकर पार्टी में नहीं आए हैं। उन्होंने कहा,
“मैं लोकसभा और राज्यसभा दोनों का सदस्य रह चुका हूं। अब मैं सांसद या विधायक बनने नहीं आया हूं। मैं चाहता हूं कि जयंत चौधरी को उसी तरह बड़ा नेता बनते देखूं जैसे Chaudhary Charan Singh थे।”
आरएलडी किसानों और मुसलमानों की पार्टी — केसी त्यागी
त्यागी ने कहा कि वह चाहते हैं कि भविष्य में ऐसा समय आए जब जयंत चौधरी के हाथों देश में प्रधानमंत्री के चयन में निर्णायक भूमिका हो, जैसा कि चौधरी चरण सिंह के दौर में Morarji Desai के साथ हुआ था।
उन्होंने कहा कि आरएलडी किसानों और मुसलमानों की मजबूत आवाज रही है। उनका दावा था कि आज़ाद भारत में उत्तर प्रदेश से जितने मुस्लिम सांसद चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में बने, उतने किसी अन्य दल से नहीं बने।
त्यागी ने यह भी कहा कि वह अपने अनुभव और राजनीतिक जीवन के बचे हुए समय को जयंत चौधरी को मजबूत करने में लगाना चाहते हैं।
2027 विधानसभा चुनाव पर भी दिया बयान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर केसी त्यागी ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि 2027 तक आरएलडी इतनी मजबूत हो जाए कि राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने में उसकी निर्णायक भूमिका हो।
1989 में पहली बार बने थे सांसद
केसी त्यागी, जिनका पूरा नाम किशन चंद त्यागी है, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति में कदम रखा और करीब पांच दशकों के लंबे राजनीतिक करियर में अपनी अलग पहचान बनाई।
वह 1989 में हापुड़ लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए थे और इसके बाद कई अहम राजनीतिक भूमिकाओं में रहे।