गाजियाबाद-सीतापुर रेल लाइन को मिली मंजूरी: 14,926 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी रफ्तार, धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा


लखनऊ। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के अहम रेल मार्ग को बड़ी सौगात देते हुए केंद्रीय कैबिनेट से गाजियाबाद-सीतापुर रेल रूट पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की योजना को मंजूरी दे दी है। करीब 14,926 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह रेल खंड गाजियाबाद से सीतापुर तक फैला है और दिल्ली से पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त मार्गों में गिना जाता है। नई लाइनों के निर्माण से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और लेटलतीफी में कमी आएगी।
इस परियोजना की खास बात यह है कि यह हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर और दूधेश्वरनाथ मंदिर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों को नैमिषारण्य धाम से जोड़ते हुए एक नया धार्मिक सर्किट तैयार करेगा, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
वर्तमान में इस रूट पर रोजाना करीब 120 यात्री ट्रेनें और 40 मालगाड़ियां संचालित होती हैं। बालामऊ जंक्शन और रोजा जंक्शन पर ट्रेनों के भारी दबाव के कारण समय पालन 60 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया है।
नई लाइनें बनने के बाद ट्रेनों को बीच मार्ग में रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और गुवाहाटी तक यात्रा तेज और सुगम हो जाएगी। साथ ही माल ढुलाई क्षमता में भी सालाना करीब 36 मिलियन टन की बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे कोयला, खाद्यान्न और पेट्रोलियम जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और बेहतर होगी।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद रेल यातायात अधिक व्यवस्थित होगा और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को इसका लाभ मिलेगा।

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