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कानपुर से सामने आए एक फोन कॉल ने पूरे मेडिकल सिस्टम को हिला कर रख दिया। अस्पताल के बेड से की गई इस कॉल में एक युवक ने आरोप लगाया कि उसकी किडनी धोखे से निकाल ली गई है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू होते ही एक बड़े किडनी रैकेट का खुलासा हुआ।
अस्पताल से की गई थी कॉल
30 मार्च को पुलिस को एक कॉल मिली, जिसमें अस्पताल में भर्ती युवक आयुष ने बताया कि वह बिहार का रहने वाला है और पैसों की जरूरत के कारण उसने किडनी देने के लिए हामी भरी थी। उसे 6 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में उसे तय रकम भी नहीं मिली।
जांच में सामने आया कि उसकी किडनी का सौदा उससे कहीं अधिक रकम में किया गया था।
वायरल वीडियो से बढ़ा शक
मामले में चार वीडियो सामने आए, जिन्होंने पूरे रैकेट पर शक गहरा दिया।
- एक वीडियो में एक व्यक्ति नोटों के ढेर पर लेटा हुआ दिखाई दिया।
- दूसरे वीडियो में एक कथित डॉक्टर विदेशी महिला की जांच करता नजर आया, जिसकी अंग्रेजी भी ठीक नहीं थी।
- तीसरे वीडियो में एक व्यक्ति 43 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाकर आत्महत्या की बात करता दिखा।
- चौथे वीडियो में एक मरीज कैमरे से चेहरा छिपाते हुए सवालों से बचता नजर आया।
इन वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस को साफ हो गया कि मामला किसी बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा है।
दिल्ली-मेरठ-कानपुर तक फैला नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह दिल्ली, मेरठ और कानपुर तक फैला हुआ था। इसमें एंबुलेंस चालक, ओटी टेक्नीशियन और कुछ डॉक्टर भी शामिल बताए जा रहे हैं।
गिरोह पहले ऐसे मरीजों को तलाशता था जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती थी। इसके बाद गरीब और मजबूर लोगों को पैसों का लालच देकर डोनर बनाया जाता था।
- मरीजों से लाखों-करोड़ों रुपये वसूले जाते
- डोनर को सिर्फ कुछ लाख देकर छोड़ दिया जाता
- ऑपरेशन के बाद मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता
चौंकाने वाला खुलासा: ‘हथौड़ा छाप’ सर्जन
जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में सर्जरी किसी योग्य डॉक्टर ने नहीं, बल्कि एक ओटी टेक्नीशियन ने की। बिना मेडिकल डिग्री के जटिल ऑपरेशन किए जा रहे थे, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही थी।
अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कुछ डॉक्टर और अस्पताल संचालक भी शामिल हैं। रैकेट का मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल बताया जा रहा है, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं।
विदेशों तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह विदेशों से भी मरीजों को फंसाता था। एक दक्षिण अफ्रीकी महिला से करोड़ों रुपये ठगे जाने का मामला भी सामने आया है।
कानून क्या कहता है
भारत में Human Organ Transplantation Act, 1994 के तहत अंगों की खरीद-फरोख्त पूरी तरह गैरकानूनी है। केवल परिवार के सदस्य या विशेष अनुमति के साथ ही अंगदान किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अंगदान की दर बहुत कम है, जबकि मरीजों की संख्या ज्यादा है। इसी कमी का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह गरीब और मजबूर लोगों को निशाना बनाते हैं।