ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता एक बार फिर बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। बातचीत से जहां तनाव कम होने की उम्मीद थी, वहीं इसके उलट हालात और ज्यादा गंभीर होते नजर आ रहे हैं।
ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा और अब “गेंद अमेरिका के पाले में” है। ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिकी शर्तों को “गैर-व्यावहारिक और अवास्तविक” बताया है और वॉशिंगटन से अधिक यथार्थवादी रुख अपनाने की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा। उसका आरोप है कि अमेरिका ने न केवल रणनीतिक स्तर पर गलत आकलन किया, बल्कि वार्ता में भी अपनी स्थिति मजबूत नहीं रख सका।
सबसे अहम बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। उसने चेतावनी दी है कि जब तक कोई ठोस और तर्कसंगत समझौता नहीं होता, तब तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया था कि करीब 21 घंटे चली इस वार्ता में कोई सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की प्रमुख शर्तों—जैसे परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी—को मानने से इनकार कर दिया।
यह वार्ता पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच पहली बड़ी सीधी बातचीत मानी जा रही थी। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ना था, लेकिन फिलहाल यह प्रयास असफल रहा है।
वार्ता विफल होने के बाद अब अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता और चिंता और बढ़ गई है।