
सम्भल। इस्लाम धर्म में माह-ए-रमजान को सबसे पवित्र और बरकत वाला महीना माना जाता है। यह महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का पैगाम लेकर आता है। दुनिया भर के मुसलमान इस पूरे महीने में रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और नेक कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, जबकि शैतानों को कैद कर दिया जाता है।
रमजान का महीना इंसान को सब्र, इंसानियत, भाईचारा और त्याग की सीख देता है। रोज़ा रखने वाले लोग सुबह सहरी के बाद पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं और शाम को इफ्तार के साथ रोज़ा खोलते हैं। इस महीने में मुसलमान नमाज, कुरआन की तिलावत, तरावीह और दान-पुण्य जैसे नेक कार्यों में विशेष रूप से हिस्सा लेते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी रोज़ा रखने के कई फायदे बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पूरे दिन रोज़ा रखने से शरीर को प्राकृतिक डिटॉक्स मिलता है, जिससे शरीर के अंदर मौजूद कई हानिकारक तत्व बाहर निकल जाते हैं।
इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को नई ऊर्जा मिलती है। कई शोधों में यह भी बताया गया है कि नियमित रोज़ा रखने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है, शरीर का वजन नियंत्रित रहता है और शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी संतुलित रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ा रखने से शरीर के अंदर जमा अतिरिक्त चर्बी कम होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। इससे कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद मिलती है।
रमजान का महीना सिर्फ इबादत का ही नहीं बल्कि आपसी भाईचारे और मोहब्बत का भी प्रतीक है।
इस महीने में लोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं, जकात और फितरा अदा करते हैं ताकि समाज में समानता और सहयोग की भावना मजबूत हो सके। रमजान के 30 रोजों के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, जब लोग एक-दूसरे से गले मिलकर खुशियां बांटते हैं।
इस तरह माह-ए-रमजान इंसान को आध्यात्मिक शांति, सामाजिक एकता और बेहतर स्वास्थ्य का संदेश देता है, इसलिए मुसलमानों के लिए यह महीना बेहद अहम और बरकतों से भरपूर माना जाता है।
रईस अल्वी वरिष्ठ संवाददाता
स्टार न्यूज़ 24