मोदी ने तेलंगाना में आयोजित एक जनसभा के दौरान देशवासियों से एक अनोखी अपील करते हुए कहा कि यदि लोग एक साल तक सोने की खरीदारी कम कर दें, तो भारत अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल आर्थिक सलाह नहीं बल्कि “आर्थिक देशभक्ति” का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश में शादियों, त्योहारों और निवेश के कारण सोने की मांग लगातार बढ़ती रहती है, जबकि इसका अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। सोने के आयात पर भारी मात्रा में अमेरिकी डॉलर खर्च होते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और चालू खाता घाटा भी प्रभावित होता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि सोने पर खर्च होने वाला पैसा देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और विकास परियोजनाओं में लगाया जाए, तो भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को देश की आर्थिक सुरक्षा का आधार बताते हुए कहा कि इसका उपयोग रुपये को स्थिर रखने और वैश्विक आर्थिक संकटों से निपटने में किया जाता है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कॉपर यानी तांबे को “भविष्य का सोना” बताते हुए इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और डिजिटल टेक्नोलॉजी में इसकी बढ़ती जरूरत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने एथेनॉल, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का भविष्य बताया।