अमेरिका में बड़ा जासूसी मामला: सिलिकॉन वैली के तीन इंजीनियरों पर Google के सीक्रेट चुराकर ईरान भेजने का आरोप

STAR NEWS 24 DESK / RAIS ALVI

अमेरिका के टेक हब सिलिकॉन वैली से एक बड़ा साइबर जासूसी मामला सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने तीन इंजीनियरों को गिरफ्तार कर उन पर Google और अन्य अमेरिकी टेक कंपनियों के गोपनीय ट्रेड सीक्रेट चोरी कर ईरान भेजने का आरोप लगाया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान समानेह घंदाली (41), सोरूर घंदाली (32) और मोहम्मदजावद खोस्रवी (40) के रूप में हुई है। तीनों कैलिफोर्निया के सैन जोस शहर के निवासी बताए जा रहे हैं। संघीय जांच एजेंसियों के अनुसार इन इंजीनियरों ने अपने तकनीकी पदों का फायदा उठाकर कंपनियों के संवेदनशील डाटा तक पहुंच बनाई और उसे अनधिकृत स्थानों पर ट्रांसफर किया।

फेडरल ग्रैंड जूरी ने लगाए गंभीर आरोप

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार फेडरल ग्रैंड जूरी ने इन तीनों के खिलाफ कई गंभीर आरोप तय किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • ट्रेड सीक्रेट चोरी की साजिश
  • ट्रेड सीक्रेट की चोरी और चोरी का प्रयास
  • न्याय प्रक्रिया में बाधा डालना (Obstruction of Justice)

अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अमेरिकी तकनीकी नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

Google के गोपनीय दस्तावेज चुराने का आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी इंजीनियरों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कंपनियों के अत्यंत गोपनीय तकनीकी दस्तावेज हासिल किए। इनमें मुख्य रूप से प्रोसेसर सुरक्षा, क्रिप्टोग्राफी और उन्नत तकनीकों से जुड़े ट्रेड सीक्रेट शामिल थे।

जांच में सामने आया कि समानेह और सोरूर घंदाली पहले Google में काम करती थीं और बाद में एक अन्य टेक कंपनी में चली गईं। वहीं मोहम्मदजावद खोस्रवी, जो समानेह के पति बताए जा रहे हैं, एक अलग टेक कंपनी में कार्यरत थे।

अभियोजकों का आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर संवेदनशील डाटा को तीसरे पक्ष के प्लेटफॉर्म और निजी डिवाइसों पर ट्रांसफर किया और कुछ जानकारी ईरान तक भेजी गई

गुप्त तरीके से डाटा बाहर भेजने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने सैकड़ों फाइलें कॉपी कीं और उन्हें कंपनी के नेटवर्क से बाहर भेजा। आरोप है कि उन्होंने इन दस्तावेजों को तीसरे पक्ष के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य निजी उपकरणों पर अपलोड किया।

इसमें कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी शामिल थी, जो अमेरिकी टेक कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त से जुड़ी हुई मानी जाती है।

सुबूत मिटाने की भी कोशिश

अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपियों ने अपने अपराध को छिपाने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने कथित तौर पर:

  • कंपनियों को झूठे शपथपत्र (Affidavit) दिए
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से फाइलें डिलीट कीं
  • डाटा ट्रांसफर के तरीकों को छिपाने की कोशिश की

ताकि जांच एजेंसियों और कंपनियों को इस गतिविधि का पता न चल सके।

Google ने खुद पकड़ा मामला

Google के प्रवक्ता होसे कास्तानेडा ने बताया कि कंपनी ने अपने नियमित सुरक्षा निगरानी सिस्टम के जरिए इस संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया। आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इसकी सूचना दी।

उन्होंने कहा कि Google अपने गोपनीय डाटा और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के लिए कड़े उपाय अपनाता है।

कड़े सुरक्षा इंतजाम

Google के अनुसार कंपनी ने अपने संवेदनशील डाटा की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी उपाय लागू किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • कर्मचारियों की सीमित डाटा एक्सेस
  • नेटवर्क एक्सेस के लिए डिवाइस प्रमाणीकरण
  • दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-factor authentication)
  • कर्मचारियों की नेटवर्क गतिविधियों की निगरानी

कंपनी अपने नेटवर्क पर फाइल ट्रांसफर की भी निगरानी करती है और पिछले साल से कॉर्पोरेट लैपटॉप से Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड भी ब्लॉक कर दिया गया है।

अमेरिकी अधिकारियों की चेतावनी

संयुक्त राज्य के अटॉर्नी क्रेग एच. मिसाकियन ने कहा कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संवेदनशील तकनीकी जानकारी चुराई है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार देश की तकनीकी नवाचार और संवेदनशील तकनीकों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल कॉर्पोरेट चोरी का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्नत तकनीकी जानकारी के लीक होने से अमेरिकी टेक उद्योग और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

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