सोशल मीडिया आज सूचना के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। कम समय में किसी भी घटना, खबर या सूचना को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इसके साथ ही सूचनाओं की विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।

हस्तलिखित नोट में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि वर्तमान समय में लोग अपनी बात और विचार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसानी से साझा कर सकते हैं। इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म सूचना प्राप्त करने के प्रमुख साधन बनते जा रहे हैं। किसी घटना की जानकारी कुछ ही समय में लोगों तक पहुंच जाती है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार बिना पुष्टि किए गए संदेश, अधूरी जानकारी अथवा भ्रामक सामग्री तेजी से प्रसारित हो जाती है। ऐसे में पाठकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए किसी भी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसके स्रोत और सत्यता की जांच करना जरूरी है।
नोट में यह भी जोर दिया गया है कि सोशल मीडिया को पत्रकारिता का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता। पत्रकारिता में तथ्यों की जांच, स्रोतों की पुष्टि और जिम्मेदारी के साथ खबर प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। सोशल मीडिया पर किसी सूचना के वायरल होने मात्र से उसकी विश्वसनीयता साबित नहीं होती।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया का उपयोग सूचना के बेहतर प्रसार के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और तथ्य-जांच भी उतनी ही आवश्यक है। सही सूचना को बढ़ावा देना और भ्रामक खबरों से बचना वर्तमान डिजिटल दौर की बड़ी आवश्यकता है।
लेख- आकिब अल्वी बहजोई, जनपद संभल यूपी