(रईस अल्वी संवाददाता )
एक समय था जब इस घर में रहने वाले तीनों भाई एक ही आंगन में बैठते थे, एक ही दरवाज़े से आते-जाते थे और सुख-दुख साझा करते थे। परिवार में प्रेम, अपनापन और एकता की मिसाल देखने को मिलती थी। लेकिन वक्त के साथ हालात ऐसे बदले कि दिलों में दूरियां पैदा हो गईं और वही दूरियां अब दीवारों के रूप में खड़ी नजर आती हैं।
आज स्थिति यह है कि एक ही घर को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है और हर भाई ने अपने लिए अलग रास्ता बना लिया है। ये रास्ते इतने संकरे हैं कि उनसे एक जनाज़ा भी ठीक से नहीं निकल सकता। इस स्थिति ने आसपास के लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर परिवार में किसी बड़े बुजुर्ग का निधन हो जाए, तो अंतिम यात्रा किस रास्ते से निकलेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन या घर का बंटवारा नहीं है, बल्कि रिश्तों के टूटने की दर्दनाक कहानी है। यह मामला समाज के लिए एक सीख भी है कि आपसी विवाद और अहंकार किस तरह परिवारों को बिखेर देते हैं।
जरूरत इस बात की है कि रिश्तों को फिर से जोड़ा जाए, क्योंकि घर दीवारों से नहीं, बल्कि दिलों से बनते हैं।