अयोध्या में आज रामलला का सूर्य तिलक, आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम

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भगवान श्रीराम की नगरी Ayodhya आज रामनवमी के पावन अवसर पर भक्ति और उल्लास से सराबोर है। देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर से श्रद्धालु यहां रामलला के जन्मोत्सव में शामिल होने पहुंचे हैं। इस बार का सबसे बड़ा आकर्षण रामलला का ‘सूर्य तिलक’ है, जिसने इस पर्व को और भी खास बना दिया है।

रामनवमी के इस शुभ अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे Ram Janmabhoomi Temple के गर्भगृह में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। मंदिर में विराजमान रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणें लगभग चार मिनट तक पड़ेंगी। यह क्षण धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सूर्य तिलक के लिए विशेष वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने कई ट्रायल रन करके यह सुनिश्चित किया कि सूर्य की किरणें बिल्कुल सटीक कोण से रामलला के ललाट पर पड़ें। इस तकनीक के जरिए आने वाले करीब 20 वर्षों तक हर रामनवमी पर इसी तरह सूर्य तिलक संपन्न कराया जाएगा।

बताया जाता है कि इस परिकल्पना को कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सामने रखा था, जिसके बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया। यह आयोजन भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के अनोखे समन्वय का प्रतीक बन गया है।

रामनवमी के अवसर पर मंदिर में सुबह 6:30 बजे से विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान शुरू हो गए, जो लगभग 11 बजे तक चले। मंदिर के कपाट पूरे दिन खुले रहेंगे ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर सकें। इस दौरान रामलला को 56 भोग और लगभग छह क्विंटल पंजीरी का प्रसाद अर्पित किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दर्शन मार्ग पर मैट, छाया और अन्य जरूरी इंतजाम किए गए हैं। पूरे आयोजन का लाइव प्रसारण एलईडी स्क्रीन के जरिए भी किया जा रहा है, ताकि दूर-दराज से आए भक्त भी इस दिव्य क्षण के साक्षी बन सकें।

शाम होते ही मंदिर का शिखर भव्य रोशनी से जगमगा उठेगा और फूल बंगला झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। इस तरह रामनवमी का यह पर्व अयोध्या में आस्था, उत्साह और तकनीकी नवाचार का अद्भुत संगम बन गया है

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