अमेरिका में बड़ा विवाद: AI कंपनी Anthropic ने ट्रंप प्रशासन पर किया मुकदमा, ‘सप्लाई चेन रिस्क’ घोषित करने पर टकराव

RAIS ALVI / NEWS DESK

अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों में शामिल Anthropic ने अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) और अन्य संघीय एजेंसियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने उसे “सप्लाई चेन रिस्क” घोषित करके गैरकानूनी और अभूतपूर्व कदम उठाया है।

दरअसल, अमेरिकी सरकार ने हाल ही में Anthropic को सप्लाई चेन जोखिम की श्रेणी में डाल दिया था। आम तौर पर यह दर्जा उन कंपनियों को दिया जाता है जिनका संबंध विदेशी दुश्मन देशों से होने की आशंका होती है। इस फैसले के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ काम करने वाली कंपनियों के लिए Anthropic की तकनीक का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है।

AI के इस्तेमाल को लेकर बढ़ा विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब Pentagon और Anthropic के बीच नई डील को लेकर बातचीत विफल हो गई। कंपनी ने रक्षा विभाग के सामने दो अहम शर्तें रखी थीं। पहली शर्त यह थी कि उसकी AI तकनीक का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की मास सर्विलांस (व्यापक निगरानी) के लिए नहीं किया जाएगा। दूसरी शर्त यह थी कि AI का उपयोग स्वचालित हथियार (Autonomous Weapons) बनाने में नहीं किया जाएगा।

Pentagon का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में वह किसी निजी कंपनी की शर्तों से बंधा नहीं रह सकता। रक्षा विभाग का तर्क है कि AI तकनीक का इस्तेमाल “सभी कानूनी उद्देश्यों” के लिए किया जाना चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में सेना को जरूरी तकनीकी सहायता मिल सके।

सरकार का बड़ा आदेश

27 फरवरी को ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए सभी संघीय एजेंसियों और सैन्य ठेकेदारों को Anthropic के साथ कारोबार बंद करने का निर्देश दिया। उसी दिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की कि Anthropic को सप्लाई चेन रिस्क घोषित किया जा रहा है और सेना से जुड़े किसी भी ठेकेदार या साझेदार को कंपनी के साथ व्यावसायिक गतिविधि करने की अनुमति नहीं होगी।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लिज हस्टन ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी किसी “वोक” या वैचारिक एजेंडा वाली टेक कंपनी को यह तय नहीं करने देंगे कि अमेरिकी सेना कैसे काम करेगी। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी सैनिकों के पास मिशन में सफलता के लिए जरूरी तकनीक उपलब्ध रहे।

Anthropic का आरोप: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन

Anthropic ने अपनी याचिका में कहा है कि सरकार की कार्रवाई कंपनी के पहले संशोधन (First Amendment) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। कंपनी का दावा है कि उसे बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के ही सप्लाई चेन जोखिम घोषित कर दिया गया।

कंपनी के मुताबिक इस फैसले से उसके करोड़ों डॉलर के मौजूदा और संभावित अनुबंध खतरे में पड़ गए हैं। साथ ही उसकी प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। Anthropic ने अदालत से आदेश जारी कर सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

टेक जगत से मिला समर्थन

इस विवाद में AI उद्योग के कई वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी Anthropic के समर्थन में सामने आए हैं। OpenAI और Google DeepMind से जुड़े दर्जनों वैज्ञानिकों ने अदालत में एक संयुक्त समर्थन पत्र दाखिल किया है। उनका कहना है कि यदि सरकार इस तरह कंपनियों को दंडित करेगी तो इससे अमेरिकी AI उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक उन्नत AI तकनीकों के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक डेवलपर्स द्वारा नैतिक सीमाएं तय करना जरूरी है।

बातचीत भी हुई लेकिन नहीं निकला हल

Anthropic के सीईओ डारियो अमोदेई ने 24 फरवरी को रक्षा मंत्री हेगसेथ से मुलाकात भी की थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। अमोदेई का कहना है कि वर्तमान समय में AI तकनीक इतनी सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं है कि उसे बड़े पैमाने पर निगरानी या स्वचालित हथियारों में इस्तेमाल किया जाए।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि Anthropic ने सेना को शर्तें देकर “गंभीर गलती” की है।

विवाद के बीच बढ़ी Anthropic की लोकप्रियता

दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद के बीच कंपनी की लोकप्रियता और बढ़ गई है। Anthropic के AI चैटबॉट Claude ने पहली बार Apple के iPhone App Store में डाउनलोड के मामले में ChatGPT को पीछे छोड़ दिया। कंपनी के अनुसार हर दिन एक मिलियन से ज्यादा नए यूजर Claude के लिए साइन-अप कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

अब यह मामला अमेरिकी अदालत में पहुंच चुका है और आने वाले समय में यह तय होगा कि सरकार का फैसला सही था या कंपनी के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस भविष्य में सरकार और AI कंपनियों के बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर बड़ा कानूनी उदाहरण बन सकता है।

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