लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर नल से जल’ योजना में खराब हुई पानी की टंकियों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। ED ने टंकियों की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी से लेकर निर्माण, गुणवत्ता जांच और ठेकेदारों को किए गए भुगतान तक का विस्तृत रिकॉर्ड जल निगम (ग्रामीण) से मांगा है।
ED ने जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक को 20 कॉलम का प्रारूप भेजकर प्रत्येक संबंधित टंकी का अलग-अलग विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। जांच के दायरे में ऐसी टंकियां शामिल बताई गई हैं, जो कमीशनिंग से पहले या बाद में गिर गईं, फट गईं या जिनमें दरार और रिसाव की शिकायत सामने आई। इसके अलावा झुकने, धंसने अथवा असुरक्षित और अनुपयोगी घोषित की गई टंकियों का रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
जांच एजेंसी ने मरम्मत या दोबारा बनाई गई टंकियों के संबंध में भी जानकारी तलब की है। इनमें प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, टेंडर, DPR, स्वीकृत स्ट्रक्चरल डिजाइन और ड्राइंग सहित निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
ED ने निर्माण का ठेका पाने वाली फर्म का नाम-पता, पंजीकरण, अनुबंध की रकम, काम पूरा करने की निर्धारित अवधि और वास्तविक पूर्णता तिथि का ब्योरा भी मांगा है। इसके साथ ही मृदा परीक्षण, मिक्स डिजाइन रिपोर्ट, स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, निर्माण सामग्री की जांच रिपोर्ट, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) और क्वालिटी ऑडिट से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।
भुगतान प्रक्रिया की पड़ताल के लिए रनिंग अकाउंट और फाइनल बिल के साथ ठेकेदार, उपठेकेदार और TPI एजेंसी से जुड़े बैंक खातों का विवरण भी मांगा गया है। ED ने यह जानकारी भी तलब की है कि भुगतान जारी करने से पहले टंकी की संरचनात्मक मजबूती का सत्यापन किस अधिकारी ने किया था। संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंताओं के नाम व पदनाम भी मांगे गए हैं।
जल जीवन मिशन पोर्टल पर अपलोड की गई निर्माण की प्रगति और काम पूरा होने की तस्वीरें भी जांच के दायरे में हैं। वहीं टंकियों में खामी सामने आने के बाद संबंधित अभियंताओं, ठेकेदारों और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों के खिलाफ निलंबन, कारण बताओ नोटिस या ब्लैकलिस्टिंग जैसी कोई कार्रवाई हुई या नहीं, इसका भी पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है।
बताया गया है कि ED की ओर से मांगी गई जानकारी में वर्ष 2021 के बाद जल निगम (ग्रामीण) में तैनात रहे अधिकारियों के कार्यकाल से संबंधित रिकॉर्ड भी शामिल है। फिलहाल मांगे गए दस्तावेजों के आधार पर निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृति प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।