योगी सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। रविवार को राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने छह नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार को भाजपा की सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
कैबिनेट विस्तार में सबसे चर्चित नाम का रहा, जिन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थामा था। ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनकी एंट्री को अवध और पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है। वहीं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को मंत्रिमंडल में शामिल कर पश्चिमी यूपी और जाट राजनीति को साधने की कोशिश की गई है।
सरकार ने पिछड़ा और दलित वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया है। हंसराज विश्वकर्मा और कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर भाजपा ने ओबीसी और दलित वोट बैंक को मजबूत संदेश देने का प्रयास किया है। इसके अलावा कैलाश सिंह राजपूत, अजीत पाल और सुरेंद्र दिलेर को भी टीम योगी में शामिल किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार केवल मंत्रिमंडल में बदलाव नहीं बल्कि 2027 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीतिक तैयारी है।