उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। के अध्यक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया को गैरकानूनी बताते हुए इसे लोकतंत्र के खिलाफ और जनता के मताधिकार का हनन करार दिया है।
अजय राय ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने आरटीआई कार्यकर्ता को दिए जवाब में स्वीकार किया है कि एसआईआर से जुड़ी कोई स्पष्ट पत्रावली या आदेश उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही नहीं है, तो यह प्रक्रिया किस आधार पर चलाई जा रही है और क्या इसके पीछे राजनीतिक दबाव है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि के दबाव में बूथ स्तर अधिकारियों पर गलत कार्य करने का दबाव बनाया गया, जिससे कई अधिकारियों की मौत तक हो गई।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में 18 वर्ष से अधिक आयु की आबादी 16 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन एसआईआर के बाद मतदाता सूची में संख्या घटकर करीब 13 करोड़ 39 लाख रह गई है, जबकि पहले यह 15 करोड़ से अधिक थी।
इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।