(रईस अल्वी संवाददाता संभल)
संभल में करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन से जुड़े बड़े मामले का खुलासा हुआ है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि संभल-मुरादाबाद हाईवे किनारे स्थित लगभग 38 बीघा जमीन पर लंबे समय से कब्जे और स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा था। जांच में सामने आया कि वर्ष 1954 में यह सरकारी जमीन केवल प्रबंधन के उद्देश्य से नगर पालिका को सौंपी गई थी, लेकिन वर्ष 1967 में नगर पालिका द्वारा कथित रूप से इसका पट्टा कर दिया गया, जिसे प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया है।
मामला कई वर्षों तक विभिन्न न्यायालयों में चलता रहा। वर्ष 1991 से 2008 तक कई बार अदालतों ने जमीन को सरकारी माना। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि तत्कालीन अधिकारियों द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर जमीन को निजी खातेदारों के नाम दर्ज कराया गया।
डीएम ने बताया कि मामले में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता, संबंधित नगर पालिका कर्मियों, नक्शा तैयार करने वाले कर्मचारियों, पट्टेदारों और बैनामा कराने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने जमीन को पुनः सरकारी खाते में दर्ज करा दिया है।