मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं के बीच संघर्ष की स्थिति, नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने कच्चे तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का भरोसा भी जताया।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हो रहे नुकसान को लेकर भारत गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा से शांति और संवाद के रास्ते से विवादों के समाधान का समर्थक रहा है और मौजूदा संकट में भी कूटनीतिक प्रयास ही सबसे कारगर विकल्प हैं।
यह बातचीत उस समय हुई है जब ईरान की ओर से रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी गई है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है, ऐसे में किसी भी बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है।
इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भी वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध और तनाव का प्रभाव दुनिया के कई देशों पर पड़ रहा है और भारत भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी टिप्पणी करते हुए लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए हर स्तर पर समन्वय किया जा रहा है।