
Star News 24 ,Rais Alvi sambhal
संभल/बहजोई। होली का पर्व जहां चौक-चौराहों पर होलिका दहन और रंगों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, वहीं महिलाओं के लिए घर के भीतर भी इसकी विशेष परंपराएं होती हैं। कई परिवारों में महिलाएं सार्वजनिक होलिका दहन स्थल पर नहीं जातीं, बल्कि घर पर ही प्रतीकात्मक रूप से पूजा-अर्चना कर पर्व मनाती हैं।
होलिका दहन की शाम महिलाएं घर के आंगन या पूजा स्थान पर रोली, चावल, हल्दी, गुड़, गन्ना और नई फसल की बालियां रखकर पूजा करती हैं। कच्चा सूत लेकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए परिक्रमा की जाती है। कई घरों में गोबर से छोटी प्रतीकात्मक होली बनाकर दीप जलाया जाता है और भगवान से परिवार की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
धुलेंडी के दिन महिलाएं सुबह घर के बड़े-बुजुर्गों को गुलाल लगाकर आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद परिवार और पड़ोस की महिलाओं के साथ हल्के-फुल्के रंगों से होली खेली जाती है। घरों में गुजिया, मठरी और अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।
इस प्रकार महिलाओं की होली घर-परिवार की खुशहाली, परंपरा और आपसी प्रेम का प्रतीक बनकर मनाई जाती है।
