RAIS ALVI
STAR NEWS 24 – डेस्क
नई दिल्ली। कक्षा 8 की एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय से जुड़े अध्याय को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने का निर्णय किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी को भी न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मामला तब सामने आया जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस विषय को चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि NCERT की कक्षा 8 की पुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित सामग्री शामिल की गई है, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। सिब्बल ने बताया कि वे बार एसोसिएशन की ओर से यह मुद्दा उठा रहे हैं।
“संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा”
CJI सूर्यकांत ने कहा, “संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और इस मामले को स्वतः संज्ञान में ले रहा हूं। कानून अपना काम करेगा।” उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला संस्थागत ढांचे के विरुद्ध प्रतीत होता है। उन्होंने इसे एक “सोचा-समझा कदम” बताया और अधिक टिप्पणी से परहेज किया।
अध्याय को लेकर बढ़ा विवाद
विवाद उस अध्याय को लेकर है जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के संदर्भों का उल्लेख किया गया है। आपत्ति जताने वालों का कहना है कि इस स्तर के छात्रों को इस प्रकार की सामग्री पढ़ाना न्यायिक संस्थाओं की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना और पारदर्शिता पर चर्चा आवश्यक है, लेकिन उसकी भाषा और प्रस्तुति संतुलित एवं जिम्मेदार होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बार एसोसिएशन और अदालत दोनों इस विषय को लेकर गंभीर हैं। “उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी इस मामले को लेकर चिंतित हैं। कुछ दिनों का इंतजार कीजिए, अदालत उचित कार्रवाई करेगी,” उन्होंने कहा।