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ईरान से जुड़े बढ़ते सैन्य तनाव के बीच Donald Trump और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer के बीच मतभेद की खबर सामने आई है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पर संभावित हमले के लिए हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति उन्हें समय पर नहीं दी गई।
ब्रिटिश अखबार The Telegraph को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह इस फैसले से “बेहद निराश” हैं। उनके मुताबिक, दोनों देशों के रिश्तों में पहले ऐसा गतिरोध नहीं देखा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ब्रिटिश सरकार घरेलू विरोध और कानूनी जटिलताओं को लेकर सतर्क थी।
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया?
Diego Garcia हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह का रणनीतिक द्वीप है, जहां अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है। यह बेस पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ब्रिटेन ने शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय संवेदनशीलता का हवाला देते हुए इस बेस से सीधे हमले की अनुमति देने में एहतियात बरती। RAF Fairford जैसे अन्य ठिकानों के उपयोग को लेकर भी सतर्क रुख अपनाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बाद में सीमित और रक्षात्मक उद्देश्य से अमेरिका को पहुंच देने पर सहमति बनी, लेकिन ट्रंप ने कहा कि यह फैसला “काफी देर से” लिया गया।
चागोस विवाद फिर चर्चा में
डिएगो गार्सिया Chagos Archipelago का हिस्सा है, जिस पर मॉरीशस भी दावा करता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत ब्रिटेन को सैन्य अड्डे के संचालन के लिए 99 साल की लीज मिली हुई है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इस विवाद के बाद ट्रंप ने कथित तौर पर चागोस से जुड़ी उस डील से समर्थन वापस ले लिया, जिसमें क्षेत्र का स्वामित्व मॉरीशस को सौंपने और बेस को लीज पर जारी रखने की योजना थी।
“हम जंग में शामिल नहीं” — स्टॉर्मर
स्टॉर्मर ने वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि यूनाइटेड किंगडम ईरान पर हमले में सीधे शामिल नहीं है। उनके अनुसार, ब्रिटिश जेट केवल खाड़ी क्षेत्र में समन्वित रक्षात्मक अभियानों का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों और संपत्तियों की सुरक्षा है।
ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच डिएगो गार्सिया का मुद्दा अमेरिका–ब्रिटेन संबंधों में नई जटिलता जोड़ रहा है। एक ओर ट्रंप इसे सहयोग में कमी मान रहे हैं, वहीं ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय कानून और घरेलू संतुलन को प्राथमिकता देता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी पर क्या असर डालता है, इस पर दुनिया की नजर रहेगी।